ग्रंथसार
मंदिर की देहरी पर कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो समय की गति धीमी होकर प्रभु के चरणों में सिमट गई हो।
राम और हनुमान · पाठ 7
मंदिर और उनकी पवित्र लय