ग्रंथसार
सच्ची भक्ति वह है जो हमारे भीतर के चरित्र को तराशकर उसे भगवान राम की मर्यादा और श्री हनुमान की निष्ठा के साँचे में ढाल दे।
राम और हनुमान · पाठ 9
भक्ति का नैतिक हृदय