ग्रंथसार
अग्नि मनुष्य और देवताओं के मध्य वह सेतु है, जिसकी ज्वाला में आहुतियां पड़ते ही वे आकाशगामी होकर दिव्य अनुकंपा को आमंत्रित करती हैं।
लोक देवता · पाठ 2
अग्नि: दिव्य संदेशवाहक