ग्रंथसार
यम का स्वरूप भय का नहीं, बल्कि उस परम सत्य का है जो जीवन के हर कार्य में नैतिकता और न्याय की मांग करता है।
लोक देवता · पाठ 5
यम: मृत्यु का निष्पक्ष सत्य