ग्रंथसार
व्रत का अर्थ केवल उपवास करना नहीं है, बल्कि अपनी संकल्प शक्ति को भगवान शिव परिवार के आदर्शों के साथ जोड़ना है।
शिव परिवार · पाठ 8
व्रत: श्रद्धा और संयम की साधना