ग्रंथसार
सृष्टि के इस विशाल प्रांगण में त्रिदेव का स्वरूप हमें सिखाता है कि हम स्वयं भी इस दिव्य नाटक के अभिन्न अंग हैं।
त्रिदेव · पाठ 10
अनंत का त्रिविध लीला दर्शन