ग्रंथसार
काल के प्रवाह में जो भी बचता है, वह केवल वह है जो मनुष्य को उसके सत्य स्वरूप की याद दिलाता है।
पराशर स्मृति · पाठ 10
पराशर स्मृति की प्रासंगिकता