ग्रंथसार
दिन की शुरुआत से अंत तक का हमारा छोटा-छोटा अनुशासित प्रयास ही वह नींव है जिस पर एक पवित्र और अर्थपूर्ण जीवन का भवन खड़ा होता है।
पराशर स्मृति · पाठ 3
दैनिक अनुशासन और आचरण