ग्रंथसार
ईश्वर की सेवा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि हृदय में उनके प्रति अटूट समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति है।
पराशर स्मृति · पाठ 7
उपासना और ईश्वरीय संबंध