ग्रंथसार
एक गृहस्थ का घर न केवल दीवारों से बना होता है, बल्कि वह धर्म और सेवा का जीता-जागता केंद्र होता है।
पराशर स्मृति · पाठ 8
गृहस्थ जीवन का मार्ग