ग्रंथसार
हमारी लोक विरासत गंगा की उस धारा की तरह है जो अलग-अलग तटों को छूकर अपना रूप बदल लेती है, पर उसका मूल जल एक ही रहता है।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 1
अंचल की अनेकता में एक विरासत