ग्रंथसार
चक्की पीसते या धान कूटते समय गुनगुनाए गए वे छंद, जो पीढ़ियों का दुख-सुख अपनी लय में पिरोते हैं।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 21
महाराष्ट्र की ओवी और घरेलू छंद