ग्रंथसार
सागर की गर्जना और नारियल के पेड़ों की सरसराहट के बीच पनपी कोंकण की लोक संस्कृति अपनी अलग ही मिठास रखती है।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 23
कोंकण के तटीय लोक परंपराएं