ग्रंथसार
पहाड़ों की ढलानों पर गूंजते इन गीतों में केवल हवा का शोर नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ी जीवन की गहराइयां बसी हैं।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 34
उत्तराखंड के गढ़वाली और कुमाऊनी गीत