ग्रंथसार
गाँव-गाँव घूमकर लोक कथाओं का संसार फैलाने वाले ये घुमंतू कलाकार ही हमारी संस्कृति के चलते-फिरते पुस्तकालय रहे हैं।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 42
घुमंतू कथावाचक और उनकी आजीविका