ग्रंथसार
गाँव की चौपाल पर जलती लालटेन के इर्द-गिर्द सिमटा वह लोकनाट्य, जो हमें हँसते-हँसते जीवन के गहरे सबक सिखा जाता था।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 43
लोकनाट्य और जीवन के पाठ