ग्रंथसार
धागों से बंधी उन नन्हीं कठपुतलियों की थिरकन में छिपी है हमारे समाज की वे अनकही कहानियाँ, जिन्हें बताने का जादू सिर्फ लोक कला में ही था।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 44
कठपुतली की कला और लोक शिक्षा