ग्रंथसार
वे अनगिनत किस्से और स्वर जो कागज पर कभी नहीं उतरे, आज भी हमारे घरों की नींव में छुपे हुए हैं।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 55
अनकही स्मृतियाँ और लोक का मौन