ग्रंथसार
लोक परंपरा किसी एक की नहीं, बल्कि उस हर व्यक्ति की है जो अपने भीतर एक पुरानी याद को जीवित रखता है।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 57
यह धरोहर सबकी है और सबमें जीवित है