ग्रंथसार
हमारी लोक संस्कृति किसी एक सीमा या समुदाय की जागीर नहीं, बल्कि यह पूरे मानव समाज की साझा सांस है।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 59
यह धरोहर सबकी है और सबमें जीवित है