ग्रंथसार
इतिहास की धूल के नीचे दबी मगध और अंग की वे लोक कथाएं, जो आज भी गांव की चौपालों और शाम के अंधेरे में जीवंत हो उठती हैं।
अंचल की लोक परंपरा · पाठ 8
मगध और अंग की लोक स्मृतियां