ग्रंथसार
गली के मोड़ से आती लकड़ी की छड़ी की वो घरघराहट आज भी यादों में एक गूँज छोड़ जाती है।
बचपन के खेल · पाठ 14
टायर का खेल: घूमता पहिया, दौड़ता बचपन