ग्रंथसार
मुट्ठी में बंद उन पाँच पत्थरों की खनक आज भी बचपन के सुनहरे पन्नों की गूँज है।
बचपन के खेल · पाठ 18
गिट्टे: पाँच पत्थरों का खेल