ग्रंथसार
अंधेरी शामों में जब दीये की लौ कांपती थी, तब घर के बड़े पहेलियों के माध्यम से हमारी सोचने की शक्ति को धार देते थे।
बचपन के खेल · पाठ 30
पहेलियाँ: बुझौवल का आनंद