ग्रंथसार
कागज की पन्नों पर बिखरे अक्षर और दिमाग की दौड़, यही तो थे हमारे वो खेल जो बोरियत को पास नहीं आने देते थे।
बचपन के खेल · पाठ 33
नाम-स्थान-वस्तु-प्राणी