ग्रंथसार
सड़क पर पड़ी एक डंडी और मुट्ठी भर कंकड़—यही तो थे वे खिलौने, जिन्होंने हमें कल्पनाओं की ऊंची उड़ान भरना सिखाया था।
बचपन के खेल · पाठ 38
कंकड़ और डंडियों के खेल: सादगी का सलीका