ग्रंथसार
घर के पुराने कपड़ों से बनी गेंद, भले ही गोल न हो, लेकिन उसमें सिलवटों के साथ जुड़ी थी माँ के हाथों की ममता और बचपन की बेफिक्र हंसी।
बचपन के खेल · पाठ 39
चिथड़ों की गेंद: अनूठा अपनापन