ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, एक प्यासे चरवाहे का सामना नदी के किनारे पहरा देते एक यक्ष से होता है।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 10
यक्ष और नदी के प्रहरी