ग्रंथसार
सूरज ढलते ही गाँव की पगडंडी पर सन्नाटा पसर जाता था और दादी बच्चों को सचेत करती थीं कि अंधेरा होने पर बाहर नहीं जाना चाहिए।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 11
चुड़ैल और शाम का साया