ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, एक फटेहाल किसान ने अपनी सूझबूझ से भरे-पूरे शहर को एक बड़ी आपदा से बचा लिया।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 20
गरीब की चतुराई