ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा: बारिश की पहली फुहार के बाद, जंगल के किनारे मोर अपने पंख फैलाकर नाचने की तैयारी कर रहा था।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 30
मोर का घमंड