ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा; राजदरबार के गलियारों में एक साधारण गड़रिए की सादगी ने अनुभवी विदूषक को भी निरुत्तर कर दिया।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 4
बुद्धिमान मूर्ख और राजा का विदूषक