ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, यह कहानी उस महिला की है जो अपनी चक्की की आवाज के साथ पुरानी यादों को पिरोकर बुनती थी।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 41
चक्की का ताल