ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा: थाली में रखा अंतिम कौर खिलाते हुए दादी ने मुस्कुराकर एक ऐसी कहानी शुरू की जो चावल के दानों जितनी ही पुरानी थी।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 43
खिलाते समय की कथा