ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, विवाह की चहल-पहल के बीच नानी ने एक पुराने संदूक के पास बैठी पोती को यह कहानी सुनाई।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 44
विवाह की रात और अनकही आशीष