ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, एक थके हुए मुसाफिर ने जब अपनी झोली खोली, तो साहूकार की आँखें चमक उठीं।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 47
साहूकार और पथिक