ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, खेत की मेड़ पर बैठे किसान ने जब एक घायल साँप को देखा, तो उसने अपना हल रोक लिया।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 49
किसान और साँप का विश्वास