ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा: एक झील के किनारे रहने वाले कछुए की इच्छा थी कि वह आकाश की ऊंचाइयों को छू सके।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 51
कछुआ और उड़ते पंछी