ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, एक गाँव के दो भाई थे जिनमें से एक अपनी थाली को हमेशा ढंक कर खाता था और दूसरा हर आने-जाने वाले को निमंत्रण देता था।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 55
साझा भोजन की सीख