ग्रंथसार
लोक-शैली की संपादकीय कथा, एक साधारण से दिखने वाले प्रवासी ने गाँव के मुखिया के अहंकार को अपनी बुद्धिमानी से चुनौती दी।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 56
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