ग्रंथसार
आँगन के कोने में बैठी छोटी सी बच्ची अपनी फटी हुई चुनरी को सहेज रही थी, तभी ठंडी हवा के झोंके के साथ उसे अपनी माँ की याद आ गई।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 7
सौतेली माँ और दयालु बच्ची