ग्रंथसार
गाँव की सीमा पर बने पुराने बरगद के पेड़ के नीचे अंधेरा गहराते ही सन्नाटा पसर जाता था, लेकिन एक छोटे बालक ने उस रात कुछ और ही तय कर रखा था।
दादी-नानी की कहानियाँ · पाठ 9
भूत-प्रेत और निडर बालक