ग्रंथसार
वह पत्थर की चौड़ी मेहराबें और आंगन, जहाँ सदियों से रुकने वाले मुसाफिरों की पदचाप आज भी दीवारों में दबी हुई है।
दर्शनीय स्थल · पाठ 13
पुरानी सराय और मुसाफिरों की याद