ग्रंथसार
खेतों की ओर जाती वह नहर और उसके ऊपर बने पुराने पुल, जहाँ बैठकर हम पानी की कल-कल धारा को घंटों सुनते थे।
दर्शनीय स्थल · पाठ 39
नगर की नहर और उसके पुल