ग्रंथसार
पुरखों के कदमों के निशान सहेजता यह रास्ता केवल एक पगडंडी नहीं, बल्कि धैर्य और आस्था की लंबी पाठशाला है।
दर्शनीय स्थल · पाठ 44
तीर्थ मार्ग और विश्राम सोपान