ग्रंथसार
वह छायादार पेड़ जिसके नीचे बैठकर आज भी ऐसा लगता है कि जैसे कोई अपनी बात कह रहा हो।
दर्शनीय स्थल · पाठ 49
संत की विश्राम-वट