ग्रंथसार
पाषाण के इन कुओं में हमने केवल पानी ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की धारा बहती देखी है।
दर्शनीय स्थल · पाठ 55
पाषाण-निर्मित कूप