ग्रंथसार
मेड़ के किनारे खंभे पर टंगा हुआ वह मुखौटा या पत्थर का छोटा सा स्वरूप, जो भरी दोपहर और काली रात में भी हमारे लहलहाते खेतों का पहरेदार बना रहता है।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 3
खेतों का रक्षक