ग्रंथसार
गाँव की सरहद के बाहर जब रात का सन्नाटा गहरा होता है, तब ढोल की थाप और गीतों के सुर लोक देवताओं को जगाते हैं।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 37
लोक देवताओं की रात्रि जागरण