ग्रंथसार
लोक-विश्वासों की धाराएं विभिन्न दिशाओं से होकर बहती हैं, जहाँ कहीं अहिंसा का मार्ग ही सर्वोपरि है, तो कहीं अलग प्रथाएं हैं।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 42
अहिंसक भेंट और लोक-परंपराओं का अंतर